मैं ऐसा गीत बनाना चाहता
हूं,
आदमी को आदमी के पास लाना
चाहता हूं,
जाती धर्म की दिवारेम, हमने
बनाई है,
न लड़ो इश्वर के नाम पर, ये
समझाना चाहता हूं।
कर रहे हैं शिक्षित बच्चों
को,
उच्च डिगरी ले पैसे कमाए,
दर दर भटकते मां बापों के,
किस्से सुनाना चाहता हूं।
देखो हम सब दौड़ रहे हैं,
जाना है कहां हम नहीं
जानते,
इस दिशाहीन भाग दौड़ से,
मैं सब को बचाना चाहता हूं।
काट डालो ये नफरत का वृक्ष,
प्रेम का अंकुर फूटने
दो,
जो नफरत है हमारे दिलों
में,
बच्चों की उस से दूरी बनाना
चाहता हूं।
सब से बड़ा है देश,
देश से बड़ा कुछ भी नहीं,
हर गली मौहले में,
ये क्रांती लाना चाहता हूं।