अफज़ल गुरु, मक़बूल भट
को शहीद कहना, आजादी हो गयी,
जिन्हे दिया दंड कानून ने
उनकी फांसी भी, शहादत हो गयी।
जो शहीद हुए देश पर
उनकी याद तक नहीं,
जो दहशत फैलाते हैं
उनकी जयजयकार हो रही।
दिखाएगा अब कौन पथ,
द्रौण भी चक्रव्युह रचा रहे
शिक्षा के मंदिरों में भी अब
घनघोर रात हो गयी।
कहां है अर्जुन?
श्रीकृष्ण कहां है?
कपटी शकुनी की चालें
नया शड़यंत्र रचा रही।
को शहीद कहना, आजादी हो गयी,
जिन्हे दिया दंड कानून ने
उनकी फांसी भी, शहादत हो गयी।
जो शहीद हुए देश पर
उनकी याद तक नहीं,
जो दहशत फैलाते हैं
उनकी जयजयकार हो रही।
दिखाएगा अब कौन पथ,
द्रौण भी चक्रव्युह रचा रहे
शिक्षा के मंदिरों में भी अब
घनघोर रात हो गयी।
कहां है अर्जुन?
श्रीकृष्ण कहां है?
कपटी शकुनी की चालें
नया शड़यंत्र रचा रही।