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शुक्रवार, जुलाई 18, 2014

सावन...

उदास हुआ दिल आज फिर से,
जब झूम- झूम कर आया सावन,
वोही पुराने ज़ख्म लेकर,
जोर-जोर से बरसा सावन।

हर तरफ जब  हरियाली देखी,
सोचा जीवन भी महकेगा,
केवल मिलन की आस जगाने,
इस बार भी आया सावन।

छम-छम जब वर्षा हुई,
सुलगा  उठी यादें पुरानी,
मंद-मंद जब पवन चली,
हलचल दिल में  मचा गया  सावन।

फूल खिले केवल  ज़ख़्मों के
हिज्र  के गीत पंछी सुनाएं।
बार बार बादल  गरजें,
आया सावन, न भाया सावन।

पपपीहे  तुम उनके पास जाना,
मेरे ये गीत, उनको सुनाना,
न भी सुने, तुम गाते जाना,
बीत न जाए जब तक सावन।

शनिवार, मार्च 16, 2013

मिलन न होगा...

कहा था तुमने कभी मुझसे,
सदा मुस्कुराना...
होंठों की इस मुस्कान को,
कभी न मिटाना...

उस वक्त मैंने भी आप से ये
वादा किया था...
तुम्हारे प्रेम  का तुम से,
सुंदर तोफा लिया था...
न जान सका तुम कहां गई,
नामुमकिन था तुम्हे भूल जाना...

फिर तुमसी जीवन में कोई और मिली,
चंद क्षणों के लिए प्रेम की कली खिली,
सोचा तुम फिर आ गयी,
पर वो तुम नहीं थी...
वो मिटाने आई थी मेरे अधरों की मुस्कान,
वो नागिन है, मैंने न पहचाना...
अब न प्रीय तुम हो,
न अब वो पहले सी  मुस्कान है,
तुम कहां हो, मैं कहां हूं,
हम दोनों ही अंजान  है...
मिलन न होगा चाहत है दिल में,
भाता है मन को, तुम पर कविता बनाना...

मंगलवार, अक्टूबर 09, 2012

प्रेम पावन


दुनिया में हर रिश्ते को, कोई न कोई नाम मिला,

राधा कृष्ण के रिश्ते को, नाम मिला न अन्जाम मिला।

श्याम की रानियां थी अनेक, न उन में से राधा थी एक।

पर समर्पण था इन सब से अधिक, फिर भी न बैकुन्ठ धाम मिला।





सब ने कहा, मथुरा न जाओ, राधा ने कहा कर्तव्य निभाओ,

राधा का समर्पण, श्याम का स्नेह, राधा को श्याम सा मान मिला।



न आकर्षण, न दिखावा, ये था केवल प्रेम पावन,

ये सुनायी देता था श्याम की मुरली में, इसे जगदीश के हृदय में स्थान मिला।



लक्ष्मी स्वरूपा थी रुख्मणी, पर जग ने राधे श्याम कहा,

प्रेम श्रेष्ठ है भक्ति से, उद्धव को ये ज्ञान मिला।