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सोमवार, अगस्त 01, 2016

नहीं आयेगा, अब वो सावन...

न बच्चों के हाथ में,
कागज की कश्तियाँ
न इंतजार है,
परदेस से   पिया का।
नहीं दिखते अब
   झूलें बागों में,
  न मेलों मे रौनक,
न तीज त्योहारों में।
अब तो सावन
डराता है,
विक्राल रूप
दिखाता है।
कहीं बाड़ आती है,
कहीं फटते हैं बादल,
होती है प्रलय,
करहाते हैं मानव।
सूखे नाले भी
कोहराम मचाते हैं,
गांव, शहर,
बहा ले जाते हैं।
न वो हरियाली,
न वो रौनक,
नहीं आयेगा,
अब वो सावन...



गुरुवार, जुलाई 16, 2015

सावन की।

बहुत यादें हैं
सब के पास
बचपन के
 सावन की।

बीता वक्त
न आता फिर से
कहती है पवन
सावन की।

व्याह हुआ
दूर हुए सब
आस थी बस
सावन की।

बाबुल का घर
मां का लाड
बुलाती है सखियां
सावन की।

होगा मिलन
अवश्य एक दिन
कहती है वर्षा
सावन की।

बदल गया है
आज सब कुछ
न बदली रुत
 सावन की।

बुधवार, जुलाई 23, 2014

आज भी मुझ को...

उस दिन मैं, जब मिला था तुम से,
वो दिन  याद है, आज भी मुझ को,
तुम्हारी प्यारी-प्यारी बातें,
सुनाई देती हैं, आज भी मुझ को...

साक्षी  है वो वृक्ष आज भी,
छाया मैं जिसकी बैठे थे,
मंद-मंद वो शीतल पवन,
देती है शीतलता,   आज भी मुझ को...

चाहता था मैं साथ चलना,
तुम्हे ये मंजूर नहीं था,
जहां हम अलग हुए,
बुलाता है वो मोड़, आज भी मुझ को...

शायद तुम भूल गयी हो,
वो सावन, वो रिमझिम वर्षा,
 प्रेम के  फूल, जो सूख गये हैं,
देते हैं खुशबू, आज भी मुझ को...

शुक्रवार, जुलाई 18, 2014

सावन...

उदास हुआ दिल आज फिर से,
जब झूम- झूम कर आया सावन,
वोही पुराने ज़ख्म लेकर,
जोर-जोर से बरसा सावन।

हर तरफ जब  हरियाली देखी,
सोचा जीवन भी महकेगा,
केवल मिलन की आस जगाने,
इस बार भी आया सावन।

छम-छम जब वर्षा हुई,
सुलगा  उठी यादें पुरानी,
मंद-मंद जब पवन चली,
हलचल दिल में  मचा गया  सावन।

फूल खिले केवल  ज़ख़्मों के
हिज्र  के गीत पंछी सुनाएं।
बार बार बादल  गरजें,
आया सावन, न भाया सावन।

पपपीहे  तुम उनके पास जाना,
मेरे ये गीत, उनको सुनाना,
न भी सुने, तुम गाते जाना,
बीत न जाए जब तक सावन।

रविवार, अगस्त 04, 2013

चलो कोई बात नहीं...



हम दोनों थे सुंदर चमन था, खिले हुए थे प्यारे फूल,
जलाया उसे खुद तुमने, चलो कोई बात नहीं।...

तुम न रोए,  रोए बाकि सब, देख झुलसाए फूलों को,
रोया मैं भी, क्या करता, चलो कोई बात नहीं।...

सूरज ने भी,   चांद ने भी,  तारों ने भी दिया सब को प्रकाश,
मैं दीपक जलाकर भी अंधेरे में रहा, चलो कोई बात नहीं।...

आया सावन, सावन ने, दी बिना मांगे सब को खुशियां,
मैं मंदिर से भी खाली लौटा, चलो कोई बात नहीं।...

मंगलवार, जुलाई 16, 2013

कहा है ये सावन ने मुझसे...




प्कृति ने मेरा स्वागत किया,
जैसे धरा ने नव रूप लिया,
गा रहे है झरने,  नदियां  गान,
भर रहे हैं पंछी ऊंजी उड़ान,
आ रहे हैं मेघ मुझे मिलने,
कहा है  ये सावन ने मुझसे...

पर पाषाण हो गया आज आदमी,
जिसे सुद नहीं है मेरे आने की,
न मेलों में रौनक न वो खान पान,
खिले हैं फूल, पर उपवन सुनसान,
न झूलों की मस्ति न कागज की कशति,
कहा है  ये सावन ने मुझसे...

न करती कोई मेरी प्रतीक्षा,
न हो रहा है   प्रेम का ही संचार,
न तरस रही है मिलन को विरहन,
दिखावा सा लगा प्रीयसी का शृंगार,
न सुनायी देता वो गीत, संगीत,
कहा है  ये सावन ने मुझसे...