शुक्रवार, मार्च 04, 2016

नया शड़यंत्र रचा रही।

अफज़ल गुरु,  मक़बूल भट
को शहीद कहना,  आजादी हो गयी,
जिन्हे दिया दंड कानून ने
उनकी फांसी भी,  शहादत हो गयी।
जो शहीद हुए देश पर
उनकी याद तक नहीं,
जो दहशत फैलाते हैं
उनकी जयजयकार हो रही।
दिखाएगा अब कौन पथ,
द्रौण भी  चक्रव्युह रचा रहे
शिक्षा के मंदिरों में भी  अब
घनघोर  रात हो गयी।
कहां है अर्जुन?
 श्रीकृष्ण कहां है?
कपटी शकुनी की चालें
नया शड़यंत्र रचा रही।



1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (05-03-2016) को "दूर से निशाना" (चर्चा अंक-2272) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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