शनिवार, फ़रवरी 27, 2016

कल भी हमारे आज पर होगा....

हम आए थे जब
याद करो दुनियां में
ईश्वर की तरह निश्छल आए   थे
न जानते थे कुछ
न कुछ पाने की इच्छा थी...
ये भी जानते हैं हम
जब दुनियां से जाएंगे
कोई साथ न चलेगा
छूट जाएगा सब कुछ यहीं,
साथ न कुछ ले जा पाएंगे...
अतृप्त वासनाए थी पूर्व जन्म में
उन्हे पूरी करने आए जन्म लेकर
इस जन्म में भी अगर
 लोभ, स्वार्थ, उच्च आकांक्षाएं होगी 
पुनः आना पड़ेगा जन्म लेकर...
 ईश्वर ने दुःख और सुख
जन्म के साथ नहीं भेजे
जो कल किये कर्म हमने
उस पर   हमारा आज है
कल भी  हमारे आज पर  होगा....


4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (28-02-2016) को "प्रवर बन्धु नमस्ते! बनाओ मन को कोमल" (चर्चा अंक-2266) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सार्थक व प्रशंसनीय रचना...
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " जय जय संतुलन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं

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