गुरुवार, फ़रवरी 11, 2016

जो थोड़े में आनंद लेता है...

न खुश हैं
वो
जिन के पास
पैसा बेशुमार हैं।
सोने के लिये
मखमल के बिसतर है
पर क्या करे
नींद नहीं आती।
भूख नहीं लगती
देखो उन्हे
जिनका एक वक्त का  खाना ही
हजार जनों  की रोटी से महंगा है...
क्योंकि वो
भाग  रहे हैं
पैसे के पीछे
पैसा फिर भी कम लगता है।
वो और तेज
भागते हैं
जब   नींद आना चाहती है
या  खाने का वक्त होता है।
भाग्यशाली वो नहीं
जिसके पास सब कुछ है,
नसीब उसका है
जो थोड़े में आनंद लेता है...

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (12.02.2016) को "विचार ही हमें बदल सकते हैं" (चर्चा अंक-2250)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. सच संतोष से बढ़कर कोई धन नहीं ..लेकिन संतोष किसी को नहीं सब भागे जा रहे है पैसे के पीछे पीछे और इंसानियत दूर होती जा रही है
    कहा गया है ..
    सच संतोष से बढ़कर कोई धन नहीं ..
    जब आवे संतोष धन सब धन धूरि सामान

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  3. सटीक रचना ।

    मेरी २००वीं पोस्ट में पधारें-

    "माँ सरस्वती"

    उत्तर देंहटाएं

ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
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