गुरुवार, दिसंबर 20, 2012

केवल भ्रम है...



कहां मरा है कीचक अभी,
कीचक न मरेगा कभी,
अगर कीचक मर जाता,
अबलाओं को कैसे नोच पाता।
कीचक को तुमने मार दिया
भीम ये तुम्हारा भ्रम है।

 गांव शहर हर मोड़ पर,
खडा है हैवानियत ओड़ कर,
मासूम नारियों पर करता है  वार,
कहता है समाज उसे बलातकार,
यौनशोषित नारी  जीवित है, 
सभ्य समाज ये तुम्हारा भ्रम है।

पांचाली ने आवाज लगाई,
दी थी श्याम  को वो आवाज सुनाई।
असंख्य नारियां करहा रही है,
श्याम  को बुला रही है,
बचाएंगे    श्याम आकर  लाज,
हिंद की बेटी  ये केवल भ्रम है।

पूजनीय है नारी जहां देवी समान,
होता है नारी का घर घर में संमान,
ये  अमानव दरिंदे कहां से आए,
जो नारी शक्ति को     समझ न पाए,
मिट गयी थी  रावण की हस्ति,
बचोगे तुम, तुम्हारा भ्रम है।

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (22-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सार्थक रचना, किन्तु अब नहीं आने वाले कोई श्याम क्यूंकि यह है कलयुग का काम, अब तो स्वयं नारी को ही लेना होगा दुर्गा या काली का रूप अथवा नहीं लगेगा कभी विराम...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बढ़िया अभिव्यक्ति
    मेरी पोस्ट ; गांधारी के राज में नारी !
    http://kpk-vichar.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  4. नारी हो न निराश करो मन को - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  5. आक्रोशित विव्हल मन से निकले भाव सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  6. आक्रोशित विव्हल मन से निकले भाव सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ मुझे उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !