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शुक्रवार, अप्रैल 08, 2016

ईस्वी केलेंडर से काम चलाते हैं।


हुआ नव वर्ष का  आगमन,
कह रहा प्रकृति का कण कण 
न जरूरत किसी  केलेंडर की
न हो पास पंचांग  भी,
प्रकृति और आकाश  को देखो,
ये सब  खुद बताते हैं,
हम पूरे अभी आजाद कहां
ईस्वी केलेंडर   से काम चलाते हैं। 
दिवाली,  दशहरा,  होली,
 विवाह  शुभ मुहूर्त, यज्ञ,  कथा,
 सभी  महापुरुषों के  जन्म दिवस,
हिंदू  संवत के अनुसार मनाते हैं,
हम पूरे अभी आजाद कहां
ईस्वी केलेंडर   से काम चलाते हैं। 
उदय हुआ था प्रथम सूरज जब,
उस दिन को क्यों भूल जाते हैं।
क्यों भारत में  हम नव वर्ष,
पोष  माह में मनाते हैं,
नहीं दिखती कहीं  नवीनता ह
उपवन खेत बताते हैं,
हम पूरे अभी आजाद कहां
ईस्वी केलेंडर   से काम चलाते हैं। 
मैकाले की शिक्षा याद रही,
वेद-पूराण हम  भूल गये,
बस इंडिया ही याद रहा,
भारत को हम भूल गये।
आया है हमारा नव वर्ष,
चैत्र नवरात्र बताते हैं।
 हम पूरे अभी आजाद कहां
ईस्वी केलेंडर   से काम चलाते हैं। 
 आप सभी को नव वर्ष की ढेरों शुभकामनायें आशा करूँगा की ये नव वर्ष आप सभी के जीवन में अपार हर्ष और खुशहाली ले कर आये..

 

शुक्रवार, अप्रैल 12, 2013

आया है अपना नव वर्ष।




आज उमंग तरंग है मन में,
आज खुशियां भरी है  तन में,
कह रहा है  कण कण आज,
आया है अपना नव वर्ष।

झूम रही है प्रकृति सारी,
लग रही है धरा स्वर्ग से प्यारी,
घर घर में पूजन हो रहा है,
आया है अपना नव वर्ष।

भर गए हैं  अन्न के भंडार,
हर तरफ है केवल बहार,
पतझड़ को कह के अलविदा,
आया है अपना नव वर्ष।

सजे  हैं मां के प्यारे दरवार,
जगदंबा की है कृपा अपार,
हो रही है सब पर कृपा की वर्षा,
आया है अपना नव वर्ष।


सब मिलकर नव वर्ष मनाना,
दिखावे के न इसे वस्त्र पहनाना,
ये वेदों का संदेश है लाया,
आया है अपना नव वर्ष।


नवसंवत 2070 की आप सब को हार्दिक शुभकामनाएं।