मंगलवार, जुलाई 16, 2013

कहा है ये सावन ने मुझसे...




प्कृति ने मेरा स्वागत किया,
जैसे धरा ने नव रूप लिया,
गा रहे है झरने,  नदियां  गान,
भर रहे हैं पंछी ऊंजी उड़ान,
आ रहे हैं मेघ मुझे मिलने,
कहा है  ये सावन ने मुझसे...

पर पाषाण हो गया आज आदमी,
जिसे सुद नहीं है मेरे आने की,
न मेलों में रौनक न वो खान पान,
खिले हैं फूल, पर उपवन सुनसान,
न झूलों की मस्ति न कागज की कशति,
कहा है  ये सावन ने मुझसे...

न करती कोई मेरी प्रतीक्षा,
न हो रहा है   प्रेम का ही संचार,
न तरस रही है मिलन को विरहन,
दिखावा सा लगा प्रीयसी का शृंगार,
न सुनायी देता वो गीत, संगीत,
कहा है  ये सावन ने मुझसे...

शुक्रवार, जुलाई 12, 2013

यही तो संसार है...



जो कल थे वो आज नहीं है,
जो आज है कल जाएंगे,
जग में रौनक कम न होगी,
कल कोई और ही आयेंगे।
आना जाना जीवन मृत्यु,
यही तो संसार है...

स्वार्थ से ही  बंधे हैं,
सब रिशते नाते व परिवार,
मोह माया में लिप्त है केवल,
है खुद पर सब को अहंकार,
वैवनस्य, नफरत और घृणा,
यही तो संसार है...

बेहिसाब करता है धन अर्जित,
जैसे साथ ले जाना है,
शड़यंत्र  लड़ाई जघड़ों में,
बिताता जीवन सारा है,
झल लोभ और महत्वाकाक्षाएं,
यही तो संसार है...

चड़ते सूरज को स्लाम,
पत्थर को मारते हैं ठोकर,
सब कुछ यहां नशवर है,
उदास न होना कुछ भी खोकर,
जहां श्री राम सुखी न रह सके,
यही तो संसार है...



शनिवार, जुलाई 06, 2013

जाओ मेघों लौट जाओ...



बुलाया था हमने मेघा आना,
बरसकर हरियाली लाना,
तुम बरसे प्रलय बनकर,
जाओ मेघों लौट जाओ...

मिटा दिये हचारों इनसान,
घर शहर बना दिये शमशान,
धन संपत्ति नष्ट हो गयी,
जाओ मेघों लौट जाओ...

तुम क्या जानो मानव की पीड़ा,
तुम तो करते हो अपनी कृड़ा,
तबाही का ये मंजर देखो,
जाओ मेघों लौट जाओ...

खिलखिलाते थे बच्चे तुम्हे देखकर,
आती थी मुस्कान किसानों के मुख पर,
पर आज सभी कह रहे हैं,
जाओ मेघों लौट जाओ...


सोमवार, जुलाई 01, 2013

दुनिया ने मुझे।



धोखा मुझे  तुमने दिया,
बेवफा कहा दुनिया ने मुझे,
तुम्हे मासूम कहा सबने,
पत्थर मारे दुनिया ने मुझे।

प्रेम न करता, अगर जानता,
तुम इतने संगदिल हो,
तुम प्रेम नगर की फूल हो,
बताया था दुनिया ने मुझे।

बनाया था दिल में मैंने,
 तुम्हारे प्रेम का शीश महल,
बेरुखी से तुमने तोड़ा उसे,
आवाज  सुनाई दुनिया ने मुझे।

मेरा लिखा हर प्रेम पत्र,
दफ्न कर दिया तुमने कहीं,
तुम्हारा लिखा हर खत,
दिखाया दुनिया ने मुझे।

जानता था  केवल मिरजा,
साहिबा ने बेवफाई की,
फिर भी उस  की वफा के किस्से,
सुनाए  दुनिया ने मुझे।