सोमवार, जुलाई 01, 2013

दुनिया ने मुझे।



धोखा मुझे  तुमने दिया,
बेवफा कहा दुनिया ने मुझे,
तुम्हे मासूम कहा सबने,
पत्थर मारे दुनिया ने मुझे।

प्रेम न करता, अगर जानता,
तुम इतने संगदिल हो,
तुम प्रेम नगर की फूल हो,
बताया था दुनिया ने मुझे।

बनाया था दिल में मैंने,
 तुम्हारे प्रेम का शीश महल,
बेरुखी से तुमने तोड़ा उसे,
आवाज  सुनाई दुनिया ने मुझे।

मेरा लिखा हर प्रेम पत्र,
दफ्न कर दिया तुमने कहीं,
तुम्हारा लिखा हर खत,
दिखाया दुनिया ने मुझे।

जानता था  केवल मिरजा,
साहिबा ने बेवफाई की,
फिर भी उस  की वफा के किस्से,
सुनाए  दुनिया ने मुझे।

6 टिप्‍पणियां:

  1. पत्थर वो सह ना सके, सचमुच नाजुक देह |
    सहना तो तुमको पड़े, करते हो क्यूँ नेह-

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

    उत्तर देंहटाएं
  3. अतुलनीय
    सार्थक अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर रचना,मन को छू गई,आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  6. शुभ प्रभात
    अच्छी हलचल की आपने आज
    सादर

    उत्तर देंहटाएं

ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ मुझे उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !