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गुरुवार, जनवरी 07, 2016

...पर उनकी तलाश पूरी नहीं होती...

मुझे याद है
जाते वक़्त उसने
कहा था मुझसे
...तुम जैसे हज़ार मिलेंगे...
मैं ये  सुनकर
चौंका पर मौन रहा
मुझे ठुकराकर
 ...फिर मुझ जैसे की ही  तलाश क्यों?...
कुछ लोग जीवन भर ही
एक अच्छे के बाद और अच्छे की तलाश में
 न जाने कितनों को तबाह कर देते हैं
...पर उनकी तलाश पूरी नहीं होती...


शुक्रवार, अप्रैल 03, 2015

मैं ही जान सकता हूं।

एक तरफा प्रेम
घातक होता है
उसके लिये
जो प्रेम करता है।
अज्ञानी पतंगा
खुद से भी अधिक
करता है प्रेम दीपक   से
भस्म हो जाता है जलकर।
कोई उसके प्रेम को
कहता है त्याग
कोई समझता है समर्पण
ये केवल  नादानी है   उसकी।
मैंने खुद देखा है
मिटकर पतंगे की तरह
क्यों जलता है पतंगा
मैं ही जान सकता हूं।

सोमवार, अगस्त 11, 2014

वो तो अभी ख्वाब है...



जो दिया था तुम्हे खुदा ने,
वो तुम्हारी तकदीर थी,
जो तुम पाना चाहते हो,
वो तो  अभी ख्वाब है...

बोला मिर्जा,  साहेबा से,
आज तुमने बेवफाई की,
वफा करोगे अगले जन्म में,
वो तो  अभी ख्वाब है...

सफर आधा कट चुका,
सफर आधा बाकी है,
कोई अब साथ चलेगा,
वो तो  अभी ख्वाब है...


जो शब्द  मेरे मौन है,
वो मौन रहेंगे शायद सदा,
उन शब्दों  को कोई सुनना चाहेगा,
वो तो  अभी ख्वाब है...

चाहत है दिल में यही,
आता रहूं मैं काम सब के,
ये जीवन किसी के काम आयेगा,
वो तो अभी ख्वाब है...

मंगलवार, जुलाई 01, 2014

ये अंतिम मुलाकात है...



मेरे नैन नम थे,
तुम भी उदास थी,
जानते थे हम दोनों ही,
ये अंतिम मुलाकात है...

तुम ने राह अलग कर ली,
मेरा पथ अलग होना ही था,
वक्त को यही मंजूर था,
ये अंतिम मुलाकात है...

खामोश रहे चमन के गुल,
दिवारें सब देखती रही,
चले गयी आखिर तुम भी,
ये अंतिम मुलाकात है...



मंगलवार, जून 24, 2014

पावन है गुल...



सुन ऐ बुलबुल,
उस गुल ने,
प्रेम किया था,
केवल तुम से...

बुलबुलें कयी आयी,
सामने उसके,
हृदय में उसके,
केवल तुम थे...

सर्वस्व किया,
तुम पर अर्पण,
न मांगा कुछ भी,
न चहा तुम से....

बुलबुल का स्वार्थ,
देखा सबने,
गुल पावन है,
जग में सब से...

सोमवार, मई 26, 2014

केवल समय गवाया हमने,



पत्थर को इनसान समझकर,
मन मंदिर में बसाया हमने...
याद करके अब तक उन को,
केवल समय गवाया हमने,

न देखी वर्षों से  बसंत  बहार,
न सावन आया, न महका गुलज़ार,
नैनों में तस्वीर थी उनकी,
उन्हे बुलाते हुए, हर पल बिताया...

जलकर पतंगा खाक हुआ,
दिपक तो फिर भी जलता रहा,
ऐ परवाने तेरी तरह ही,
हर पल खुद को जलाया हमने...

आकर्षण को तुमने प्रेम माना,
 मन का सौंदर्य न पहचाना,
स्तंभ  है प्रेम का केवल  विश्वास,
हर कदम पे धोखा खाया हमने...

सोमवार, जुलाई 01, 2013

दुनिया ने मुझे।



धोखा मुझे  तुमने दिया,
बेवफा कहा दुनिया ने मुझे,
तुम्हे मासूम कहा सबने,
पत्थर मारे दुनिया ने मुझे।

प्रेम न करता, अगर जानता,
तुम इतने संगदिल हो,
तुम प्रेम नगर की फूल हो,
बताया था दुनिया ने मुझे।

बनाया था दिल में मैंने,
 तुम्हारे प्रेम का शीश महल,
बेरुखी से तुमने तोड़ा उसे,
आवाज  सुनाई दुनिया ने मुझे।

मेरा लिखा हर प्रेम पत्र,
दफ्न कर दिया तुमने कहीं,
तुम्हारा लिखा हर खत,
दिखाया दुनिया ने मुझे।

जानता था  केवल मिरजा,
साहिबा ने बेवफाई की,
फिर भी उस  की वफा के किस्से,
सुनाए  दुनिया ने मुझे।