मंगलवार, अगस्त 16, 2016

हे भारत! आज तुम बिलकुल अकेले हो...

हे भारत
आज तुम बिलकुल अकेले हो,
इस महाभारत के रण में,
न कृष्ण है
न अर्जुन,
न धर्मराज,
आज विदुर भी,
तुम्हारा हित नहीं चाहता।
भिष्म द्रौण
और कृपाचार्य की निष्ठा,
आज मात्रभूमि के प्रति नहीं,
कुर्सी के प्रति है...
आज भी जंग भी,
सिंहासन के लिये ही है,
पर आज के राजा,
तुम्हारी खुशहाली नहीं,
अपनी खुशहाली चाहते हैं,
अब सत्य कोई नहीं बोलते,
न टीवी चैनल, न अखबार,
न लेखक न कवि,
न विद्वान न ज्ञानी,
इस लिये जंता भी  भ्रमित है।
सुभाष जैसों को आज भी,
कहीं नजरबंद किया जा रहा है...

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" गुरुवार 18 अगस्त 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. शायद भारत तो वहीं है उसके चाहने वाली नहीं हैं ...

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  3. एक.दम सही कहा आपने । बहुत ही सटीक रचना । अभिवादन स्वीकार करें ।

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  4. एक.दम सही कहा आपने । बहुत ही सटीक रचना । अभिवादन स्वीकार करें ।

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