सुन ऐ बुलबुल,
उस गुल ने,
प्रेम किया था,
केवल तुम से...
बुलबुलें कयी आयी,
सामने उसके,
हृदय में उसके,
केवल तुम थे...
सर्वस्व किया,
तुम पर अर्पण,
न मांगा कुछ भी,
न चहा तुम से....
बुलबुल का स्वार्थ,
देखा सबने,
गुल पावन है,
जग में सब से...