मंगलवार, जून 24, 2014

पावन है गुल...



सुन ऐ बुलबुल,
उस गुल ने,
प्रेम किया था,
केवल तुम से...

बुलबुलें कयी आयी,
सामने उसके,
हृदय में उसके,
केवल तुम थे...

सर्वस्व किया,
तुम पर अर्पण,
न मांगा कुछ भी,
न चहा तुम से....

बुलबुल का स्वार्थ,
देखा सबने,
गुल पावन है,
जग में सब से...

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  2. बुलबुल का स्वार्थ,
    देखा सबने,
    गुल पावन है,
    जग में सब से...
    ..... निस्वार्थ भाव की ही प्रसंशा है जग में !

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  3. शानदार रचना की प्रस्‍तुति

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