जो कल थे वो आज नहीं है,
जो आज है कल जाएंगे,
जग में रौनक कम न होगी,
कल कोई और ही आयेंगे।
आना जाना जीवन मृत्यु,
यही तो संसार है...
स्वार्थ से ही बंधे हैं,
सब रिशते नाते व परिवार,
मोह माया में लिप्त है
केवल,
है खुद पर सब को अहंकार,
वैवनस्य, नफरत और घृणा,
यही तो संसार है...
बेहिसाब करता है धन अर्जित,
जैसे साथ ले जाना है,
शड़यंत्र लड़ाई जघड़ों में,
बिताता जीवन सारा है,
झल लोभ और महत्वाकाक्षाएं,
यही तो संसार है...
चड़ते सूरज को स्लाम,
पत्थर को मारते हैं ठोकर,
सब कुछ यहां नशवर है,
उदास न होना कुछ भी खोकर,
जहां श्री राम सुखी न रह
सके,
यही तो संसार है...