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मंगलवार, नवंबर 10, 2015

मनाते हैं हम दिवाली...


[आप सब को पावन पर्व दिवाली की शुभकामनाएं...]
 पे राम
तुम दूर रहे
14 वर्षों तक
अंधकार सा लगा
 सब को तुम बिन
पर अंधकार नहीं था
न अन्याय था
राजा थे भरत...
वनवास काटकर
जब आये तुम
माएं हर्षित  हुई
जंता झूम उठी
पंछियों ने भी
जी भर के खाया
सब ने मिलकर
मनाई दिवाली...
पर आज
न तुम हो
न भरत
न तुम्हारी चरणपादुका।
है केवल
अन्याय,  भ्रष्टाचार
भय, हिंसा,
अनैतिकता और  आतंकवाद... 
हमे  विश्वास है
तुम्हारे वचन पर
होती है  जब-जब
धर्म की हानी
आते हो तुम
मानव बनकर
इस विश्वास से ही
मनाते हैं हम दिवाली...

गुरुवार, अक्टूबर 22, 2015

पावन चरित्र सीता का...

श्री राम
सामान्य पुरूष नहीं
मर्यादा पुरुषोत्तम
आदर्श राजा थे...
ईश्वर थे
भले ही राम
पर सीता   के बिना
 पूर्ण  नहीं थे...
सुख में भी
वो  साथ   रही
दुख  में भी
साथ दिया...
महलों में रही
या वनों में
पालन किया
पतिव्रत धर्म  का...
अगर न होती
अग्नि परीक्षा
 शंका के बादल
बार-बार घिर आते...
आदर्श राजा
कहलाते कैसे
रघु-कुल की रीत
बचाते कैसे...
अग्नि परीक्षा
ने दिखाया  जग को
पावन चरित्र
 सीता का...  
न छुह सका रावण
न जला सकी अग्नि
देकर अग्नी  परीक्षा
सर्वश्रेष्ठ,   बनी...
श्री राम ने
नारी का
सदा ही
 संमान किया......
राम को जानो
 सीता  को पहचानो
राजा के धर्म को 
अन्याय न कहो...


मंगलवार, अक्टूबर 20, 2015

राम नहीं मिलते...

आज हम
अपने बच्चों को
उच्च शिक्षा देकर
बड़ा  आदमी बनाने का
ख्वाब देखते हैं
ख्वाब पूरा भी हो जाता है...
पर हम भूल जाते हैं
उच्च शिक्षा के साथ
बच्चों के सामने
चरित्र निर्माण के लिये
राम का चरित्र होना चाहिये... 
इसी लिये आज
रावण की तरह
बड़े तो बहुत हैं
भरत, Laxman,
राम नहीं मिलते...