हर एक आदमी
चाहे छोटा हो या बड़ा,
अमीर हो या गरीब,
ख्वाब तो देख सकता है...
ख्वाब देखने के लिये,
न कहीं जाना पड़ता है,
न कुछ देना पड़ता है,
न किसी के आगे गिड़गिड़ाना पड़ता है...
न रिशवत देनी पड़ती है,
न रूपये पैसे की जरूरत होती है,
डिगरी भी हो या न हो,
ख्वाब तो देखे जा सकते हैं...
पर ख्वाब पूरा करने के लिये,
ये सब कुछ करना पड़ता है,
फिर भी पता नहीं,
ख्वाब पूरा हों या न हो...
इसी लिये आज भी
भारत का युवक,
अनेकों डिगरियां होने पर भी,
ख्वाब देखने से डरता है...
चाहे छोटा हो या बड़ा,
अमीर हो या गरीब,
ख्वाब तो देख सकता है...
ख्वाब देखने के लिये,
न कहीं जाना पड़ता है,
न कुछ देना पड़ता है,
न किसी के आगे गिड़गिड़ाना पड़ता है...
न रिशवत देनी पड़ती है,
न रूपये पैसे की जरूरत होती है,
डिगरी भी हो या न हो,
ख्वाब तो देखे जा सकते हैं...
पर ख्वाब पूरा करने के लिये,
ये सब कुछ करना पड़ता है,
फिर भी पता नहीं,
ख्वाब पूरा हों या न हो...
इसी लिये आज भी
भारत का युवक,
अनेकों डिगरियां होने पर भी,
ख्वाब देखने से डरता है...