बुधवार, दिसंबर 09, 2015

हमे कुछ नहीं चाहिये मुफ्त का कुछ भी

एक नेता
सरकारी स्कूल के
छोटे-छोटे बच्चों को भी
सरकारी योजनाएं
गिनवा रहा था...
दोपहर का भोजन
मिलता है मुफ्त
नहीं लगता
स्कूल आने में किराया
न सिलवानी पड़ती है
वर्दी भी अब...
एक बच्चा
उसी वक्त
मंच के सामने आया
जिसकी फटी   हुई  वर्दी
नेता जी के भाषण पर
मानो व्यंग कर रही हो...
वह कांपते हुए बोला
हमे कुछ नहीं चाहिये
मुफ्त का कुछ भी
बस आप
मेरे पापा की
 शराब छुड़वा दो...

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10 - 12 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2186 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  2. कुलदीप जी, आपका ब्लॉग पसंद आया.

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ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
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