गुरुवार, अगस्त 14, 2014

हमने आज़ादी पाई है...

जीतकर एक लंबी जंग,
हमने आजादी पाई है,
पुत्रों ने धर्म निभाया,
मां की पीड़ा मिटाई है...
साक्षी है सूरज चंदा,
सत्य गंगा कहेगी,
शहीदों  ने अपने खून से,
ये हरियाली लाई है...
लड़े अंत तक, पर हार न मानी,
शीश  मां का कभी,  झुकने न दिया,
खुद मरते हुए, दस और मारे,
सीख गोविंद की सदा  ही,  काम आयी है...
न हस्ति इसकी कभी, मिटने देंगे,
जग अंबर में हिंद, चमकता रहेगा,
हमने इसकी पावन माटी,
सदा मस्तक पे लगाई है...

[स्वतंत्रता दिवस की असंख्य शुभकामनाएं...]

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (15.08.2014) को "विजयी विश्वतिरंगा प्यारा " (चर्चा अंक-1706)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. अपनी आजादी को हरगिज भुला सकते नहीं की तर्ज पर बहुत सुन्दर देशप्रेम जगाती प्रस्तुति
    स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

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  3. आपकी लिखी रचना शनिवार 16 अगस्त 2014 को लिंक की जाएगी........
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  4. बढ़िया ...........स्वतंत्रता दिवस की ढेरों शुभकामनाएं

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  5. शीश मां का कभी, झुकने न दिया...की तर्ज पर बहुत सुन्दर देशप्रेम जगाती प्रस्तुति...

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  6. सुंदर प्रस्तुति

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