गुरुवार, जून 25, 2015

किसी वृक्ष को काटने से पहले

किसी वृक्ष को
 काटने से पहले
एक पल के लिये ही सही
अवश्य सोचना.

इस वृक्ष पर
घर है पंछियों का
जो उजड़ जाएगा।

एक के बाद एक
आते हैं थककर पथिक
पाते हैं शीतलता
अब कहां बैठेंगे?

तेज धूप में तुमने भी
थक कर कभी
इस की छाया में
वक्त तो बिताया होगा।


आज ये वृक्ष
 बेबस खड़ा है
देखकर कुलाहड़ी में
अपना अंश

हो सकता है
तुम्हारे  अच्छे वक्त के बाद
ये वृक्ष ही
तुम्हारे काम आये।

5 टिप्‍पणियां:

  1. बृक्ष हैं तो जीवनदायनी ऑक्सीज़न हैं हमारे पास वरना कैसे जियेगा इंसान। .
    बहुत सुन्दर चिंतनशील रचना

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्यवाद...
      बहुत दिनों बाद अपने ब्लौग पक कुछ लिखने का प्रयास किया....

      हटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-06-2015) को "यही छटा है जीवन की...पहली बरसात में" {चर्चा अंक - 2018} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आप का बहुत बहुत धन्यवाद।

      हटाएं
  3. ब्लॉग बुलेटिन की १००० वीं बुलेटिन, एक ज़ीरो, ज़ीरो ऐण्ड ज़ीरो - १००० वीं बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं

ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ मुझे उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !