सोमवार, अगस्त 25, 2014

बोलो-बोलो पाकिस्तान...

कितनी बार शिकस्त है खाई,
रण छोड़ के कब कब भागे हो,
तबाही करके क्या पाया अब तक,
बोलो-बोलो पाकिस्तान...

कितने बच्चे भूखे हैं,
कितनी नारियां घुटन में मर्ती,
कितने मासूम बेमौत मर्ते,
बोलो-बोलो पाकिस्तान...

न तुम्हारा कोई धर्म- इमान,
न शिक्षा देता ये इस्लाम,
कौन है खुदा, जेहाद ये कैसा,
बोलो-बोलो पाकिस्तान...

हिंदुओं की सुनकर दशा,
थर-थर रुह कांपती है,
कब तक खून बहेगा मानवता  का,
बोलो-बोलो पाकिस्तान...

कहता भारत सुनो तुम से,
अमन ही हमारी शकती है,
खुशहाली चाहिये या संहार,
बोलो-बोलो पाकिस्तान...

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के लिए चुरा ली गई है- चर्चा मंच पर ।। आइये हमें खरी खोटी सुनाइए --

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  2. वो क्या बोले ...वो कहते हैं न "छाज तो बोले से बोले छलनी क्या बोले, जिसमें सौ छेद।" वाली स्थिति है
    ...बहुत सटीक

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