गुरुवार, जुलाई 17, 2014

यादें...



टूट गये खिलौने सब,
नहीं हैं  वो मित्र अब,
बजपन की अब मेरे पास,
यादें हैं केवल शेष,
इनसान चले जाते हैं,
फिर लौटकर नहीं आते हैं,
हमारे पास वो  केवल,
कुछ यादें छोड़ जाते हैं...

जीवन के इस लंबे सफर में,
मिलते हैं कयी इनसान,
कौन कब तक साथ चलेगा,
हम सभी हैं इस से अन्जान,
वृक्ष के सभी फूल भी,
अलग अलग मुर्झाते हैं...
हमारे पास वो  केवल,
कुछ यादें छोड़ जाते हैं...

असीम और अनोखा है,
यादों का ये संसार,
बीते हुए दिन हमे,
याद आते हैं बार बार,
जो दिल में जगह बना ले,
वो बहुत ही   याद आते हैं...
हमारे पास वो  केवल,
कुछ यादें छोड़ जाते हैं...

ये यादें ही दिलों में,
मिलन की आस जगाती  हैं,
बिछड़े हुए इनसानों से,
ख्वाबों में भी मिलवाती हैं,
कुछ यादें तो हंसाती हैं,
कुछ से नैन भर आते हैं...
हमारे पास वो  केवल,
कुछ यादें छोड़ जाते हैं...

अगर ये यादें न होती,
निरस होता हमारा जीवन,
जाने वाले चले जाते,
लगता केवल सूनापन,
अतीत को याद करके ही,
हम नयी राह बनाते हैं...
हमारे पास वो  केवल,
कुछ यादें छोड़ जाते हैं...

5 टिप्‍पणियां:

  1. पुरानी यादों की सुन्दर प्रस्तुति।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (18-07-2014) को "सावन आया धूल उड़ाता" (चर्चा मंच-1678) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. यादें जीवित रहने का साधन हैं ... सच कहा ..

    उत्तर देंहटाएं

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