शनिवार, नवंबर 07, 2015

हर जंग कलम ने ही जीती है...

ओ लिखने वालो
तुम्हारे पास
वो शब्द हैं
जो बदल सकते हैं
पवन की दिशा
जिन के बल पर
तुम
क्रांती ला सकते हो...
तुम्हारे पास
कलम की ताकत है
वो कलम
जिसका लिखा
रामायण का
एक एक शब्द
भविष्य में
सत्य हुआ...
आद तुम ही
और शस्त्र
हाथ में लिये
कलम के बिना भी
बदलना चाहते हो
आज के हालातों को
कैसे लिखने वाले हो
जो कलम को ही  भूल गये...
साक्षी है समय
कलम के  सिपाहियों ने
विश्व में आज तक
असंख्य क्रांतियां लाई है
कौन कहता है
शस्त्रों से जीती जाती है जंग
जानो, पढ़ो इतिहास
हर जंग कलम ने ही जीती है...

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (08-11-2015) को "अच्छे दिन दिखला दो बाबू" (चर्चा अंक 2154) (चर्चा अंक 2153) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बिल्‍कुल सही कहा आपने कि हर जंग कलम ने ही जीती है। कलम की धार के आगे तलवार की धार बेकार ही साबित होती है।

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  3. सच कलम की धार तलवार की मार से तीक्ष्ण होती है .
    बहुत सुन्दर विचारशील रचना ...

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  4. कलम की धार का तो जवाब ही नहीं है जी

    उत्तर देंहटाएं

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