गुरुवार, अक्तूबर 16, 2014

आंसू भी हैं...

ठेके पर बिकने वाली,
हर बोतल में,
केवल शराब ही नहीं,
आंसू भी हैं...
उस औरत के आंसू,
जो दिन भर प्रिश्रम करके,
शाम को घर में आकर,
हिंसा का शिकार होती है...
उस बच्चे के आंसू,
जिस की फीस के पैसे,
स्कूल में नहीं,
ठेके पर दे आये....
उस मां के आंसू,
जिस की दवा के लिये,
उस के बेटे के पास,
पैसे न होने का बहाना है...
ये आंसू,
शराब से भी अधिक
खतरनाक हैं,
इन से बचके रहना...

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (17.10.2014) को "नारी-शक्ति" (चर्चा अंक-1769)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. बहुत सुन्दर भाव ..सचाई को प्रस्तुत करती रचना !
    इश्क उसने किया .....

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  3. सुन्दर रचना।
    जब आता है दुःख तभी,
    लोचन तन-मन धोता है।
    आँसू का अस्तित्व,
    नहीं सागर से कम होता है।।

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  4. बहुत ही खूबसूरत....बेहतरीन अभिवयक्ति

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