मंगलवार, सितंबर 18, 2012

आप की जुदाई पर।


सिस्कियाँ लेकर आया सवेरा, उदास है हरेक चेहरा,

सूनी है प्रकृति सारी, आप की जुदायी पर।

 

न हैं फूलों पर मुस्कान, न गा रहे हैं विहग गान।

नम  है देखो सभी नेत्र, आप की जुदायी पर।

 

झरने की कलकल, तुम्हे बुलाती, पवन विरह गीत सुनाती,

आईना आंसू बहा रहा है, आप की जुदायी पर।

 

दुखी है आज रजनीकर, कानन, विटप  निर्झर,

मेघों में रवि गुम है, आप की जुदायी पर।

 

दसों दिशाएं हैं उदास, दुखी है धर्ति और आकाश,

मन्दिर में भगवान मऔन है, आप की जुदाई पर।

4 टिप्‍पणियां:

  1. कल 20/09/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर.....
    बढ़िया...


    अनु

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  3. सुन्दर भावभीनी रचना...

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ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
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