सोमवार, जून 16, 2014

नेत्रों से दूर, न जाने देना...



[मां हाटेशवरी से  प्रार्थना के रूप में चंद शब्द]

स्विकार करो, नमन मेरा,
मैं हूं मां, सुत तेरा,
तेरे दर को छोड़, जाऊं कहां,
सदा  दर पे, शीश झुकाने देना।

सब दिया है तेरा, मैं क्या अर्पण करू,
सत्य  बोलने से, मैं क्यों डरूं,
दो पुष्प लेकर तेरे दर पे आया,
इन पुष्पों को न मुर्झाने देना...

डाली  ने ये पुष्प, धरा पे गिराए,
मैं क्या करता, तेरे दर पे लाए,
मैं अंजान, तुम जानती हो सब,
बस इन्हे मुस्कुराने देना...

चाहते हैं ये फूल खिलना,
नहीं चाहते, ये धूल में मिलना,
ये पुष्प ही है, विश्वास  मेरा,
नेत्रों से दूर, न जाने देना...

मंगलवार, जून 03, 2014

ये सोचकर मन बहलाया...



होंठों की हंसी कहां गयी?
नैनों में नीर कहां से आया।
इस चमन में कल चहल-पहल थी,   ,
आज सूनापन क्यों  है छाया...

चली कहीं से ऐसी पवन,
उजड़  गया,  पल भर  में उपवन,
मैं बस केवल  देखता रहा,
कुछ भी मेरे हाथ न आया...

पूछा मैंने फूलों से,
तुम इतनी जल्दी क्यों मुर्झाए,
कहते कहते रो पड़े,
मन का भेद, मन में  छुपाया,

जो हुआ, वो होनी है,
जो उजड़ गया, नशवर था,
खिलेंगे फूल, महकेगा चमन,
ये सोचकर मन बहलाया...

रविवार, जून 01, 2014

गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...



मानव ने आवाहन किया,
शिवजी  ने मुझे आदेश दिया,
स्वर्ग का सुख छोड़ के आयी,
गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...

आयी थी मैं धरा पर,
अमृत  सा पावन जल लेकर,
उर्वर  बनाया बंजर को,
गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...

रोया जब  हिंद मैं भी रोई,
संकटों के समय, मैं भी न सोई,
अर्पण किये भिष्म से सुत,
गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...

जहां चाह   तुमने, मेरे जल को रोका,
 उद्योगों  का कचरा मुझमे फैंका,
मौन रही, न क्रोधित हुई,
गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...

चाहते  हो मेरा अस्तित्व बचाना,
जल को मेरे शुद्ध, पावन बनाना,
और नदियों को मत भूल जाना,
गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...

स्वच्छ होगा जब,  सब नदियों का जल,
सुनहरा होगा, आने वाला कल,
जल बिना, नहीं है जीवन,
गंगा हूं मैं, हिंद की पहचान...

मंगलवार, मई 27, 2014

हम रहें या न रहें, रहेगा सदा वतन




[ भारत के नव नियुक्त प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी द्वारा चुनाव से पहले या बाद में  अपने भाषणों में भारत मां की वंदना में कुछ शब्द कहे गये हैं, उन्हे ही कविता का रूप देने का प्रयास कर रहा हूं]

हम रहें  या  न रहें,
रहेगा सदा वतन,
खिलते रहेंगे, नये फूल,
महकता रहेगा सदा ये   चमन...

असंख्य हैं सुत मां के,
जो चाहत न रखते कुछ भी मां से।
करते अपना सर्वस्व अर्पण,
साक्षी है 10 दिशाएं, गग्न.........

अनेकों वीर,  शहीद हुए,
कुछ वतन के लिये,  ही जिये,
पटेल   जैसे सपूतों ने,
दिया मां को, सुर्क्षा का वचन...

कर सकूं सेवा,  मैं भी मां की,
जीवन सफल,  होगा तभी,
मां मुझे केवल  ये शकती दो,
कोटी कोटी, तुम्हे नमन...