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सोमवार, जून 16, 2014

नेत्रों से दूर, न जाने देना...



[मां हाटेशवरी से  प्रार्थना के रूप में चंद शब्द]

स्विकार करो, नमन मेरा,
मैं हूं मां, सुत तेरा,
तेरे दर को छोड़, जाऊं कहां,
सदा  दर पे, शीश झुकाने देना।

सब दिया है तेरा, मैं क्या अर्पण करू,
सत्य  बोलने से, मैं क्यों डरूं,
दो पुष्प लेकर तेरे दर पे आया,
इन पुष्पों को न मुर्झाने देना...

डाली  ने ये पुष्प, धरा पे गिराए,
मैं क्या करता, तेरे दर पे लाए,
मैं अंजान, तुम जानती हो सब,
बस इन्हे मुस्कुराने देना...

चाहते हैं ये फूल खिलना,
नहीं चाहते, ये धूल में मिलना,
ये पुष्प ही है, विश्वास  मेरा,
नेत्रों से दूर, न जाने देना...