एक दिन हम भी
साथ चले थे
एक पथ पर
एक बहाव में
एक थे कल
आज दो हैं
इन दोनों
नदियों की तरह।
ये नदियां भी
कल एक थी
पर कुछ लोगों ने
अपने स्वार्थ के लिये
मोड़ दिया
इन के जल को
हो गया विछेद
बन गयी दो नदियां।
एक नदि तो
तुम्हारी तरह
बहने लगी
आनंद के बहाव में
एक नदि को
बहना पड़ा
केवल मजबूरी से।
उस नदि की
कल कल करती
आवाज में भी
ऐहसास होता है
बिछोड़े की
उदास खामोशी का।
साथ चले थे
एक पथ पर
एक बहाव में
एक थे कल
आज दो हैं
इन दोनों
नदियों की तरह।
ये नदियां भी
कल एक थी
पर कुछ लोगों ने
अपने स्वार्थ के लिये
मोड़ दिया
इन के जल को
हो गया विछेद
बन गयी दो नदियां।
एक नदि तो
तुम्हारी तरह
बहने लगी
आनंद के बहाव में
एक नदि को
बहना पड़ा
केवल मजबूरी से।
उस नदि की
कल कल करती
आवाज में भी
ऐहसास होता है
बिछोड़े की
उदास खामोशी का।