जन्म के साथ ही
मृत्यु भी
चलती है साथ
छाया की तरह।
मौत तो
हर क्षण ही
शत्रु की तरह
खोजती है अवसर
होता है जो
बुझदिल और कायर
उसे शिघ्र
बना लेती है अपना।
वीरों से तो
भय लगता है
उसको भी
दूर दूर ही रहती है।
आती है
कयी रूप रंग बदलकर
पर वीर तो
उसे पहचान लेते हैं।
हर साहसी को
वर्दान होता है
इच्झा मृत्यु का
भिष्म की तरह...
मृत्यु भी
चलती है साथ
छाया की तरह।
मौत तो
हर क्षण ही
शत्रु की तरह
खोजती है अवसर
होता है जो
बुझदिल और कायर
उसे शिघ्र
बना लेती है अपना।
वीरों से तो
भय लगता है
उसको भी
दूर दूर ही रहती है।
आती है
कयी रूप रंग बदलकर
पर वीर तो
उसे पहचान लेते हैं।
हर साहसी को
वर्दान होता है
इच्झा मृत्यु का
भिष्म की तरह...