मकर संक्रांति वर्ष में,
दिवस है सब से पावन,
जीवन और वातावरण में
होता है दिव्य परिवर्तन।
सूर्य देव का होने लगा
उत्तर को अब गमन
अंधकार सब दूर हुआ,
हुआ धरा पर चानण।
प्रातः ही नदियों पर जाकर
करना पावन स्नान,
फिर ईश्वर की वंदना करके,
दोनों हाथों से करना दान।
नकारात्मकता को नष्ट करो,
कहता है ये पर्व,
जीवन में उच्च कर्म करो,
धरा ही है स्वर्ग।