मैंने अपना मत
दिया था जिसे,
मतगणना में
उसे शिकस्त मिली।
न क्षेत्र देखा
न जाती
न हवा की तरफ
अपना मत बदला।
दल को मैं
महत्व नहीं देता,
आशवासन, भाषण
बहुत सुन चुका।
देखा था मैंने
व्यक्तित्व उसका
वो बदल सकता था
देश की इस धुंधली तसवीर को।
मैं अकेला हूँ , लेकिन फिर भी मैं हूँ.मैं सबकुछ नहीं कर सकता , लेकिन मैं कुछ तो कर सकता हूँ, और सिर्फ इसलिए कि मैं सब कुछ नहीं कर सकता , मैं
वो करने से पीछे नहीं हटूंगा जो मैं कर सकता हूँ.-हेलेन केलर
यहां प्रकाशित रचनाएं मेरी अपनी हैं।
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