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शुक्रवार, जनवरी 13, 2017

दुनियां में।

हम आए अकेले, इस दुनियां में,
न लाए साथ कुछ दुनियां में,
शक्स ही रहे तो मर जाएंगे,
बनो शक्सियत इस दुनियां में।
जो भी मन में प्रश्न हैं,
उनका उत्तर गीता में पाओ,
जब ज्ञान दिया खुद ईश्वर ने,
क्यों भटक रहे हो दुनियां में।
जो ज्ञान न मिला भिष्म  को,
न द्रौण को, न विदुर को,
वो ही  ज्ञान अब  गीता का,
सब के पास है दुनियां में।
फिर भी सभि भ्रमित हैं,
अकारण ही चिंतित हैं,
न अर्जुन न दुर्योधन रहे,
उनके कर्म रहे इस दुनियां में।