गुरुवार, नवंबर 22, 2012

श्रधांजली

लड़ते हैं जो सरहदों पर,सर्वस्व अपना त्याग कर.
धरती है जिनके लिये भगवान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
क्रांति जिनका नारा था, देश खुद से प्यारा था,
देश को है जिनपर अभिमान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
जो वीरता से लड़े थे, खुद सूली पर चढ़े थे,
वीरता थी जिनकी पहचान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
जो सदा के लिये अमर हो गये, शहादत की गोद में सो गये.
मौत का मांगा था वर्दान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
देखकर इनकी कुर्वानी, भर आता है आंख में पानी,
नहीं कर सकता शब्दों से बखान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.

1 टिप्पणी:

  1. आशीर्वाद तो आपके पास पहले से है , उस माँ का जो आपको जन्म दी और एक अच्छा इंसान बनाई ............. बाकी .... मैं तो आपके लिए दुआ कर सकती हूँ कि आप हमेशा कामयाब हों ..... !!

    उत्तर देंहटाएं

ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ मुझे उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !