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शनिवार, जनवरी 23, 2016

कहां गुमनाम हो गये।

तुम्हारी कुर्वानी से
हम आजाद हो गये
तुम गये कहां
कहां गुमनाम हो गये।
आजादी के बाद
राज मिला उनको
जो देश को भूलकर
राज भोग में खो गये।
जो देखा था
आजादी का सपना तुमने
सपना पूरा हुआ ही था
हम फिर सपनों में खो गये।
अगर होते तुम
देश का ये हाल न होता
तुम्हें मिटाकर वो
खुद दावेदार हो गये।

गुरुवार, नवंबर 22, 2012

श्रधांजली

लड़ते हैं जो सरहदों पर,सर्वस्व अपना त्याग कर.
धरती है जिनके लिये भगवान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
क्रांति जिनका नारा था, देश खुद से प्यारा था,
देश को है जिनपर अभिमान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
जो वीरता से लड़े थे, खुद सूली पर चढ़े थे,
वीरता थी जिनकी पहचान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
जो सदा के लिये अमर हो गये, शहादत की गोद में सो गये.
मौत का मांगा था वर्दान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.
देखकर इनकी कुर्वानी, भर आता है आंख में पानी,
नहीं कर सकता शब्दों से बखान, ऐसे वीरों को मेरा प्रणाम.