6 दिसंबर का महत्व
हिंदुओं के लिये भी
मुस्लिम के लिये भी है।
पर एक हिंदूस्तानी के लिये
इस का महत्व
0 है।
गिराए गये मंदिर कयी
शोर भी न दिया सुनाई
सोचा क्यों खून बहाएं
आताताई उस बाबर की
मस्जिद गिरने की चिंगारी
आज भी क्यों थमती नहीं।
जो भी हुआ है कल
भूल जाना अच्छा है उसे
न किसी की जीत है उस में
न प्राजित हुआ है कोई
वो रक्त किसी राज नेता का नहीं
आम आदमी का था।
एक हिंदूस्तानी को
न वहां मंदिर चाहिये
न मस्जिद
आवश्यक्ता है अस्पताल की
या स्कूल चाहिये।
हिंदुओं के लिये भी
मुस्लिम के लिये भी है।
पर एक हिंदूस्तानी के लिये
इस का महत्व
0 है।
गिराए गये मंदिर कयी
शोर भी न दिया सुनाई
सोचा क्यों खून बहाएं
आताताई उस बाबर की
मस्जिद गिरने की चिंगारी
आज भी क्यों थमती नहीं।
जो भी हुआ है कल
भूल जाना अच्छा है उसे
न किसी की जीत है उस में
न प्राजित हुआ है कोई
वो रक्त किसी राज नेता का नहीं
आम आदमी का था।
एक हिंदूस्तानी को
न वहां मंदिर चाहिये
न मस्जिद
आवश्यक्ता है अस्पताल की
या स्कूल चाहिये।