शनिवार, नवंबर 19, 2016

उन्हे पूजता है तभी संसार...

नानक के इस धरा पर,
हैं गुरु आज, कई हजार,
पर  नानक सा   नहीं  है कोई,
इसी लिये है अंधकार...
जब भूल गये थे गीता को,
श्री कृष्ण की अमर कविता को,
   अन्याय, अधर्म  का राज्य था,
हो रहा था शोषण जंता का।
तब नानक ने गीता समझाई,
गुरु ग्रंथ में लिखा सार...
कहा था ये  दशम गुरु ने,
गुरु ग्रंथ को ही  गुरु मानना,
ये गुरु कौन है, कहां से आये,
फिर इन्हें गुरु क्यों मानना।
इन्हें देश धर्म की चिंता नहीं,
ये कर रहे हैं केवल व्यपार...
सरकारें चाहे कुछ भी करे,
ये गुरु हैं,  कुछ नहीं बोलते,
पांचाली के चीरहरण पर,
अब भी ये न मुंह खोलते।
भोली-भाली जंतां से,
मांगते हैं पैसा बेशुमार...
इन पर न कोई कर लगता,
ये खूब मौज उड़ाते हैं,
जब इनकी चोरी पकड़ी जाए,
 शिष्य शोर मचाते हैं।
इन्हें कानून का भय नहीं,
 ये हैं  धर्म के ठेकेदार...
राम ने रावण को मारा,
कृष्ण ने  कंस संहारा,
विष पीकर शंकर कहलाए,
गोविंद ने चार सुत गवाए।
युग-पुरुष वोही, जो युग को बदले,
उन्हे पूजता है तभी संसार...

7 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर शब्द रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर प्रस्तुति । पांच लिंकों का आनंद की लिंक खुल नही रही है। कृपया देखिएगा।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही अच्छी रचना है, मुझे बहुत पसंद आई....

    एक नई दिशा !

    उत्तर देंहटाएं
  4. नव वर्ष की मंगलकामनाएं
    http://savanxxx.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं

ये मेरे लिये सौभाग्य की बात है कि आप मेरे ब्लौग पर आये, मेरी ये रचना पढ़ी, रचना के बारे में अपनी टिप्पणी अवश्य दर्ज करें...
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ मुझे उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !